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वर्तमान में कैसे जियें | How To Live in Present Moment in Hindi

 

वर्तमान क्षण के यथार्थ को समझें ( Live in present moment)

  • * वर्तमान क्षण के यथार्थ को पूर्णतः समझ पाना तभी संभव है, यदि हम भूतकाल में घटित हुई सभी बातों को एक सपना मान लें। जब आप अब तक घटित सब बातों को सपना मान कर छोड़ देते हैं, तब एक खुले मन से सत्य को समझ सकते हैं।

  • * भूतकाल ही है, जो हावी होकर हमारे मन को बोझिल बना देता है। इस भूत से पीछा छुडाये बिना आप भूतनाथ (शिव) को नहीं पा सकते। भूतनाथ को पाने के लिए आपको भूतकाल कि सब बातों को एक सपना मानना होगा और यह कुछ मुश्किल काम नहीं। इसके लिए बस थोड़ी सी जागरूकता कि आवश्यकता है।

  • आप ने कुत्ते, बिल्लियों आदि को देखा होगा, कभी कभी वे पानी या मिट्टी में लोटते हैं, परंतु जब वे उठते हैं, वो तुरंत अपने शरीर को हिला कर सब नीचे फेंक देते हैं और आगे बढ़ जाते हैं। बिलकुल इसी प्रकार आप भी पानी या कीचड़ में खेल सकते हैं, परन्तु थोड़ी थोड़ी देर में खड़े होकर सब नीचे झाड दें और जागरूक हो जायें। तब आप पायेंगे कि भगवान शिव यहीं है, अभी, बिलकुल यहीं।
जब अप ऐसा बार-बार करते हैं, तो यह अहसास आप में जागने लगता है और आपके भीतर गहरा होता चला जाता है

अपने मनोबल को पहचाने ( Power Of Subconscious Mind)


  • बहुत बार लोग हतोत्साहित हो जाते हैं और कहते हैं, ‘ओह, मुझे किसी चीज में मजा नहीं आ रहा। ‘किसी भी चीज का मजा लेने के लिए आपको मन में भरे बाकी सभी विचारों को अनदेखा करना पड़ता है। हमारी दिलचस्पी इसलिए कम हो जाती है, क्योंकि मन अतीत कि घटनाओं में उलझा होता है।
  • अच्छी या बुरी घटनायें हों, आपके मित्र या शत्रु रहे हों, ये सब आपके मन को उलझाये रखते हैं और इसे इतना बोझिल बना देते हैं। उन्होंने आपके मन में इतना घर कर लिया होता है, लगता है मानो आपने अपने मन का वह भाग उन्हें किराए पर दे रखा हो। अतीत आपके मन में घर बनाये रहता है, परन्तु बदले में आपको कुछ नहीं मिलता। इस सौदे में बस घाटा ही घाटा है।
  • इसलिए थोड़े-थोड़े समय में आपको खड़ा होना होगा और कहना होगा, ‘यह मेरा घर है’, और अतीत को बाहर फेंकना होगा अन्यथा अतीत की घटनायें आपके वर्तमान पर हावी हो जायेंगी और आपको यह यकीन दिला देंगी कि आपका अपना समय आपका नहीं रहा। इसलिए अतीत को आपके मन का क्षय करके, आपको अव्यवस्थित करके दुखी न बनाने दें।

    जब आप अब तक घटित सब बातों को सपना मान कर छोड़ देते हैं, तब एक खुले मन से आप वर्तमान क्षण के सत्य को समझ सकते हैं।

    जब हमारे जीवन में यह जागरूकता आ जाती है, चाहे हर रोज़ थोड़े क्षणों के लिए ही सही कि – अतीत में जो भी हुआ, अच्छा या बुरा, बस एक सपना ही था, तो आपको जीवन में किसी भी चीज़ का सामना करने का बल मिल जाता है। तब आपको अपनी चेतना में उस उर्जा की तरंग और उस विस्तार की अनुभूति होगी, जिसको कि पहले इन घटनाओं ने छुपा रखा था।

    अतीत की घटनायें अब नहीं रहीं। जो हम कह चुके हैं या कर चुके हैं, उसे हम नहीं बदल सकते। परंतु, वर्तमान में, हमारे पास अपने विचारों, शब्दों और कार्यों का चुनाव करने की क्षमता है। तो फिर सोच-विचार किस बात का, जब हमारे पास परिवर्तन लाने का सामर्थ्य है।

    इसलिए, थोड़े- थोड़े समय में उठिए और अतीत को झाड़ फेंकिये और देखिये कि सब कुछ सपना है। यही ‘साधना’ का सार है।

    साधना का अर्थ किसी दूसरे स्थान या आयाम में जाना नहीं है। इसका अर्थ यहीं और अभी अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का निर्वाह करना, परन्तु साथ ही इन सबसे परे रहना और समय समय पर सर्वोच्च सत्य के प्रति जागरूक होते रहना। यह अपनी चेतना को परम सत्य कि ओर जागृत करते रहना है।

    जब हम अपनी चेतना को समय समय पर जागृत करते रहते हैं, तो जीवन कितना अदभुत हो जाता है। न केवल आपके अपने लिए, बल्कि आपके आसपास बाकी सब के लिए भी। तब आपके निकट आने वाले सब लोगों को भी शांति और प्रसन्नता की अनुभूति होती है, आपके आसपास इतनी सकारात्मक ऊर्जा और अच्छी तरंगें होती हैं। अपने भीतर और चारों ओर इस सकारात्मक ऊर्जा के निर्माण के लिए यही एक रास्ता है।



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